इजराइल में संसदीय चुनाव के बाद वोटों की गिनती जारी है। अब तक 53.7% वोटों की गिनती में नेतन्याहू गठबंधन 55 सीटों के साथ आगे है।
वहीं, गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 50 सीटें मिलती दिख रही हैं। अरब पार्टियों के जॉइंट लिस्ट और राअम पार्टी को मिलाकर 15 सीटें मिलने का अनुमान है।
इजराइली संसद में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 61 सीटें जरूरी हैं। चुनाव से पहले ओपिनियन पोल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की हार का अनुमान जताया गया था।
चुनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने नेतन्याहू को मिली बढ़त का श्रेय लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि उनके समर्थन के बाद चुनाव का माहौल बदल गया।
ट्रम्प के मुताबिक, पहले नेतन्याहू की हार का अनुमान लगाया जा रहा था, लेकिन अब मुकाबला बराबरी का हो गया है और वे जीत भी सकते हैं।
ट्रम्प ने नेतन्याहू को मिली बढ़त का क्रेडिट लिया
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने नेतन्याहू का समर्थन करने का श्रेय लेते हुए कहा कि उनके समर्थन के बाद नेतन्याहू की चुनावी स्थिति में सुधार हुआ।
ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा,

जब पूरा माहौल बदल गया। अब एक बड़े नेता की करारी हार के बजाय मुकाबला बराबरी का दिख रहा है, यहां तक कि नेतन्याहू की जीत भी हो सकती है।
नेतन्याहू-आइजनकोट दोनों बहुमत नहीं जुटा पाए तो क्या होगा
अगर नेतन्याहू और आइजनकोट, दोनों बहुमत जुटाने में नाकाम रहते हैं और कोई भी गठबंधन सरकार बनाने की स्थिति में नहीं पहुंचता, तो इजराइल में दोबारा चुनाव कराने की नौबत आ सकती है। तब तक नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं।
हालांकि, दोबारा चुनाव होना अभी तय नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि चुनाव के बाद पार्टियां किसे समर्थन देती हैं, गठबंधन बनाने के लिए क्या समझौते होते हैं और कोई नेता संसद में बहुमत का समर्थन जुटा पाता है या नहीं।
यानी इजराइल में दोबारा चुनाव की आशंका की मुख्य वजह यह है कि नेतन्याहू और आइजनकोट, दोनों के लिए 61 सांसदों का समर्थन जुटाना मुश्किल हो सकता है। नेतन्याहू अरब पार्टियों के समर्थन पर निर्भर नहीं रहना चाहते, जबकि आइजनकोट को बहुमत के लिए उन्हीं पार्टियों की मदद की जरूरत पड़ सकती है। यही गतिरोध सरकार गठन में रुकावट बन सकता है।
नेतन्याहू बहुमत के आंकड़े से 4 सीटें पीछे
41.9% वोटों की गिनती पूरी होने के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के समर्थन वाले गठबंधन को 57 सीटें मिलती दिख रही हैं। वहीं, नेतन्याहू विरोधी गठबंधन को 47 सीटें मिली हैं।
अरब पार्टियों वाले जॉइंट लिस्ट और राअम गठबंधन को मिलाकर 16 सीटें मिलती दिख रही हैं। ये शुरुआती नतीजे हैं। वोटों की गिनती आगे बढ़ने के साथ आंकड़े बदल सकते हैं।
इजराइल की संसद में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी गठबंधन को कम से कम 61 सीटों की जरूरत होती है। इस हिसाब से नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत के आंकड़े से 4 सीटें पीछे है।
पूर्व इजराइली राजदूत आइजनकोट को चेतावनी दी
इजराइल में पूर्व राजदूत एलन पिंकस का कहना है कि चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाले गठबंधन को सरकार बनाने के लिए किसी ऐसे दल से समझौता करना पड़ सकता है, जिसके साथ जाना उसके लिए मुश्किल होगा।
पिंकस न्यूयॉर्क में इजराइल के महावाणिज्यदूत के तौर पर भी काम कर चुके हैं। उन्होंने अल जजीरा से कहा कि विपक्ष के मतदाता नहीं चाहेंगे कि उनका गठबंधन नेतन्याहू के गठबंधन के साथ समझौता करे।
उन्होंने कहा कि अगर गादी आइजनकोट नेतन्याहू के गठबंधन के साथ हाथ मिलाते हैं, तो मतदाता उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे।
पिंकस के मुताबिक, अगर दोनों पक्षों के बीच ऐसी सरकार बनती है, जिसमें प्रधानमंत्री का पद बारी-बारी से साझा किया जाए, तो इससे सरकार में लगातार खींचतान और कामकाज में बाधा पैदा होगी।
जॉइंट लिस्ट गठबंधन को जानिए
जॉइंट लिस्ट पार्टी को शुरुआती रुझानों में 11 सीटें मिलने का संकेत है। यह इजराइल की अरब आबादी के अधिकारों की बात करने वाला राजनीतिक गठबंधन है। यह तीन अलग-अलग पार्टियों का साझा चुनावी मोर्चा है। इसमें अरब नेताओं के साथ यहूदी नेता भी शामिल हैं।
हदाश: यह वामपंथी पार्टी है। यह अरब और यहूदी नागरिकों की समानता, मजदूरों के अधिकारों और फिलिस्तीन के साथ शांति की वकालत करता है।
ताल: यह अहमद तिबी की पार्टी है। यह अरब नागरिकों के लिए समान अधिकार, शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसरों और फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना का समर्थन करती है।
बलद: यह अरब राष्ट्रवादी विचारधारा वाली धर्मनिरपेक्ष पार्टी है। यह इजराइल को ऐसा देश बनाने की वकालत करती है, जहां सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलें।
जॉइंट लिस्ट पहली बार 2015 के इजराइली चुनाव से पहले बनी थी। उस समय अरब समुदाय की चार प्रमुख पार्टियों ने एक साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया था।
इस गठबंधन ने 2015 के चुनाव में 13 सीटें जीतीं। सितंबर 2019 के चुनाव में भी इसे 13 सीटें मिलीं, जबकि 2020 में यह बढ़कर 15 सीटों तक पहुंच गई।
हालांकि, मतभेद के कारण 2021 के चुनाव से पहले राअम इससे अलग हो गई। 2022 में हदाश और ताल ने साथ चुनाव लड़ा, जबकि बलद अलग हो गई और संसद में पहुंचने के लिए जरूरी वोट नहीं जुटा पाई। 2026 में हदाश, ताल और बलद ने फिर साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया। राम इस बार भी अलग रही।
इजराइल के केंद्रीय चुनाव आयोग के मुताबिक, संसद चुनाव में 16 लाख से ज्यादा वोटों की गिनती हो चुकी है। आंकड़ों में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे आगे है।
लिकुड को अब तक गिने गए वैध वोटों में 22.24% मिले हैं। वहीं, गादी आइजनकोट की याशर पार्टी 15.41% वोटों के साथ दूसरे नंबर पर है।
फिलिस्तीनी मूल के इजराइली नागरिकों की जॉइंट लिस्ट 8.28% वोटों के साथ तीसरे नंबर पर पहुंच गई है। उसने नफ्ताली बेनेट की पार्टी को मामूली अंतर से पीछे छोड़ दिया है। बेनेट की पार्टी को 8.22% वोट मिले हैं।
ये शुरुआती नतीजे हैं। वोटों की गिनती जारी रहने के साथ आंकड़े बदल सकते हैं।
इजराइल में करीब 73.3 लाख मतदाता वोट डालने के पात्र थे। इनमें से 56.9 लाख से ज्यादा लोगों ने मतदान किया।
अरब पार्टियों की सीटें बढ़ने का अनुमान
32.5% वोटों की गिनती के बाद अरब पार्टियों को 15 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। इसमें राअम पार्टी को 4 और जॉइंट लिस्ट को 11 सीटें मिलने के संकेत हैं।
जॉइंट लिस्ट इजराइल की अरब पार्टियों का साझा चुनावी गठबंधन है। इसमें तीन पार्टियां शामिल हैं, जो मिलकर चुनाव लड़ती हैं।
हदाश: वामपंथी पार्टी, जिसमें अरब और यहूदी दोनों समुदायों के सदस्य हैं।
ताल: अरब नागरिकों के अधिकारों पर जोर देने वाली पार्टी।
बलद: अरबों के राष्ट्रीय अधिकारों और समानता की वकालत करने वाली पार्टी।
जॉइंट लिस्ट गठबंधन का नेतृत्व यूसुफ जबरीन करते हैं। अहमद तिबी भी इसके प्रमुख नेताओं में शामिल हैं